Wednesday, 18 March 2015

Rani ki Vav | Tourisam in Gujarat | A Wonder full Destination

Tuesday, 17 March 2015

रानी की वाव :



रानी की वाव :

For Rani ki vav video  :: https://youtu.be/F6ZlCG0MoH


रानी की वाव गुजरात राज्य के पाटन शहर में आई हुई है |

ये जगह 22 June 2014 को यूनेस्को के द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित कि गयी है |

इस जगह का ऐतिहासिक महत्व तो है ही साथ में कलात्मकता के हिसाब से भी ये जगह बहुत महत्वपूर्ण है | इसलिए यहाँ हजारों की तादाद में देश विदेश के सहेलानी इस जगह की मुलाक़ात लेने के लिए आते है |

आणहिल वाड पाटन के शोलंकी  वंश के राजा भीमदेव -१ की रानी उदयमती
ने ११ वि शताब्दी के अंत में ये जगह बनवाई थी |

पीने के पानी की जरुरत को पूरा करने के लिए ये जगह बनवाई थी |

वाव जिसे सीडियो वाला कुंवा कह सकते है |
इस वाव ( step well ) की गहराई 27 मी. लम्बाई 64 मी. और चौड़ाई 20 मी. है |

आपको जान कर हैरानी होगी, की बहुत साल पहले ये पूरी जगह किसी पानी के बहाव के कारण जमीन के अंदर चली गई थी | और बीसवी शताब्दी के अंत तक ये जगा लोगो से अलिप्त रही |

1980 के करीब भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे सावधानी से खोदा, बहुत सालो की मेहनत के बाद ये इसके मूल रूप में आई  |

इस जगह का आर्किटेक्चरल महत्व तो आप उसकी कला कृति देख कर समज गए होगे | ये वाव सात मंजिला है | यहाँ भगवान विष्णु के दस अवतार जैसे राम, वराह वगेरह है | साथ ही अप्सराओ के नाग कन्या के मनमोहक गेस्चर्स की मूर्ति है | और बहुत सी डिजाइन भी उकेरी गई है |

Tuesday, 13 January 2015

Uttrayan : उतरायण






 For Video Link : http://youtu.be/xMA96cK7Dw0
उतरायण भारत का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है उत्तरायण का अर्थ है “उत्तर की और जाना” ये सूर्य के लिए है इस दिन के बाद भारत से देखने पर सूर्य उत्तर की और उगना सुरु करता है

ये एक खगोलीय घटना है, भारतीय सभ्यता में प्रकृति को काफी महत्व दिया जाता है और ये एक प्रकृति से जुडी घटना है
 
इस त्यौहार की खास बात ये है की ये एक ऐसा त्यौहार है जो अंग्रेजी केलेंडर के मुताबिक भी हर साल निश्चित तारीख को आता है वरना भारतीय त्यौहार अंग्रेजी केलेंडर के मुताबिक नहीं होते क्युकी भारतीय केलेंडर चंद्र पर आधारित होता है

इस त्यौहार से एक और बात साफ होती है की भारतीय सभ्यता को भूगोल का अच्छा ज्ञान था और सालो से हमारी संस्कृति में जुड़े - बसे ये सारे त्यौहार कोई ना कोई प्रकृति के पहेलु को उजागर करते है

उतरायण की सूर्य की घटना का सीधा सम्बन्ध आकाश से है इस लिए इस त्यौहार को आसमान के साथ मनाया जाता है इस त्यौहार को गुजरात में काफी धूम धाम से मनाया जाता है गुजारत के करीब हर गावो और शाहेरो में 14 जनवरी को सुबहसे लोग अपनी या दूसरों की छातों पे चड जाते है साथमे ढेर सारी पतंगे लिए और फिरकी ( दोर से भरा एक लकडीका साधन )

यहाँ और भी बहोत कुछ होता है जैसे सुरक्षा के इंतजाम और ढेर सारा खानाजिसमे गुड की चिकी, जिंजरा ( कचे हरे चने ), गन्ना, आदि सारी चीजे होती है

दोपहर को खास, पुरे गुजरात में “ऊँधिया का शाक” एक मिक्स सब्जी जारूर होती है जोर जोर से गाना बजाना और दूसरों की पतंग जब कटती है सब जोर से चिल्लाते है  “ कायपो छे ! ”    

गुजरात गवर्नमेंट भी इस त्यौहार को बड़े पैमाने पे मनाती है ओर इसे इंटरनेशनल फंक्शन बना दिया है देश विदेश से भारी मात्रा में लोग इस त्यौहार का आनंद लेने के लिए गुजरात के “ इंटरनेशनल काईट फेस्टिवल ” में आते है